यह भक्तीकी खोजमें है प्रभु का नजारा ।

(तर्ज: तू गंगा की मौज में जमुना की धारा.. )

यह भक्तीकी खोजमें है प्रभु का नजारा ।
होगया है मिलन, न   हमारा - तुम्हारा ।। टेक ।।
अगर फूल भक्ती, तो खुशबू प्रभू है।
न दोनों जूदा हो यही आरजू है।
ध्यान लगाओजी! खुदका लेकर सहारा,होगया 0।।1।।
जगी ध्यानसे ही अमर प्रेम-ज्योती ।
मिला भक्तिसागर में गुरुग्यान मोती ।
भेद हटा, तुकड्याने    पाया   उजारा,  होगया0।। 2 ॥