प्रिय है नाम तेरा , जो गावे सुख पावे मनमें ।

प्रिय है नाम तेरा  ।।टेक।।
जो गावे सुख पावे मनमें ।
कभु नहीं दुःख होता जीवनमें। ।
निर्मल मन रहता सुधरा ।।1 ।।
नाम जपे और काम करे नर।
उसको नहिं दुनियामें है डर।।
तिर  जावे  संसार  पुरा  ।। 2 ॥
जिसने जिसने नाम पुकारा ।
अपना -परका भेद निवारा।।
अमर हआ जगमें गहरा ।।3 ॥
तुकड्यादास कहे रे प्राणी ।
प्रभु बिन बिरथा हैं जिंदगानी । ।
समझ समझ प्रभु बोल जरा ।।4।।