नहीं चाहता हूँ कि मैं मुफ्त खाऊँ ।
नहीं चाहता हूँ कि मैं मुफ्त खाऊँ ।
बिना कष्टके पाप सरपे लगाऊँ ।।
करूँ खुदहि मैं और सबको सिखाऊँ।
प्रभू! इसलिये शक्ति दे, प्रार्थता हूँ ।।1॥
खुदीके अगर काम खुद ना करूँगा ।
तो औरोंने करना मैं किस मुँह कहूँगा ? ।।
मेरा काम मेरी सफलताका कारण ।
दिजो इसलिये काममें शक्ति मोहन! ।।2।।
मेरा काम करके मैं निर्मल बनूँगा।
बचाकर समय अन्यकों साथ दूँगा ।।
मैं पलभर कहूँगा और दिनभर करूँगा ।
प्रभू! शक्ति दे, इसलिये ही जिऊँगा ।।3॥
मेरी हस्ति यह और क्या काम देगी ? ।
बिना काम जो सिर्फ मुर्दा रहेगी! ।।
किसी दिन इसे छोड देना पड़ेगा ।
न सेवा बनेगी तो क्या लाभ होगा? ।।4॥
मेरा कामही रामको प्रीय होगा।
बिना कामके प्रेम सबका टुटेगा।।
इसीके लिये मैं करूँ नित्य सेवा।
तभी तो मिलेगा मुझे अंत मेवा! ।।5।।