नहीं रहा जात जिया मोरा।

(तर्ज: बन चले राम रघुराई...)

नहीं  रहा  जात   जिया  मोरा।
प्रभु ! तुमबिन सब अंधियारा ।।टेक ।।
तुम हो तन-मंदिरमें दीपक।
तुम हो सब बगियनमें पुष्पक।
तुमबिन सूनो प्रेम निरंतर,
पल भी न होत गुजारा।।१॥।
सांवली सूरत, मोहनी मूरत ।
पल पल अँखियनकी हे रंगत ।
मै जानत मेरा दिल बोले,
अमृत ध्यान तुम्हारा ।।२।।
सब बिछुडे प्रभू ! तुम ना भूलो ।
जैसी भी हो आस निभालो।
तारो यह निर्बलसा बालक,
तुकड्याको दो दर्श तुम्हारा ।।३।।