मानव भजनशील है प्राणी । सहज -धर्म गुणखाणी।। मानव
(तर्ज : राम भजन सबसे अति प्यारा...)
मानव भजनशील है प्राणी ।
सहज -धर्म गुणखाणी।। मानव 0 ।। टेक ।।
पर नहीं ग्यान-स्थानको जाने, करके हुआ अभिमानी ।
किसका भजन गया विषयोंमे, पाया दुख -हैरानी ।।1।।
किसने भजन किया है धनका, लगी पिछू शैतानी।
किसको भजन लगा सत्ताका, लगी द्वेष की बानी ।।2।।
किसने भजन किया मंदर में, हुआ पंथ का प्रेमी।
जैसा अंधा भागे पथसे, भटके अनघड गामी ।।3।।
तुकड्यादास ग्यान निजरुपका, वोही भजन निर्वाणी ।
और भजन है जनमका द्वारा, प्रभू नाम सत्वाणी ।।4॥