नाचूंगा मैं भी प्रभुके भजनमें, जाहीर होकर बोलूं सजन में ।
(तर्ज : चाहंगा मैं तुझे सांझ सबेरे. ...)
नाचूंगा मैं भी प्रभुके भजनमें, जाहीर होकर बोलूं सजन में ।
अभिमान खोके सारा, अभिमान खोके सारा ।।टेक ॥
होकर दिवाना, देखूँ जमाना, आँखोमें भर दूँ प्रभु का निशाना ।
चढे तार, बेडापार, रंगू रंगमें ।
अभिमान खोके सारा, अभिमान खोके सारा ।। 1 ॥
तूही तो धन है, तूही तो मन है, तेरे बचन ही मेरा भजन है।
तेरा प्यार, मेरा सार, भरूं अंगमे।
अभिमान खोके सारा, अभिमान खोके सारा ।। 2 ॥
चारों दिशामें तेरी ही सूरत, जहाँ देखता हूँ तेरी ही मूरत।
जपूं माल, घुले तार, टुटे जाल ।
अभिमान खोके सारा, अभिमान खोके सारा ।।3 ॥
तुकड्याको जिसने ये राह बोला, उनकी दयासे पाया उजेला ।
तेरा नाम, मेरा काम, पाऊँ अराम।
अभिमान खोके सारा, अभिमान खोके सारा ॥ 4।।