बैठे है तेरा ध्यान लगाये प्रभू! तार सके तो तार
(तर्ज: हेरी मे तो प्रेमदिवानी... )
बैठे है तेरा ध्यान लगाये प्रभू! तार सके तो तार ।। टेक ।।
जनम- जनम के पाप हमारे ।
बिन किरपा तेरी कौन सुधारे ।
समझ गये हम अनुभवसे यह, तूही करेगा पार ।।१।।
जपतप साधन तीरथ घूमे ।
मंदर मंदर मूरत चूमे ।
चंचल मन यह मानत नाही, करत जिया बेजार ।।२।।
घडिघडि पलपल उलटे स्वाँसा ।
पर नहीं आयी दिलमें आसा ।
तुकड्यादास उदास भयो है, तुझपर सौंपा भार ।।३ ।।