भोग में सदा झुरता मरता। तू राम - भजन क्यों नहीं करता
तर्ज नववधू प्रिया मी वापरते....)
भोग में सदा झुरता मरता।
तू राम - भजन क्यों नहीं करता ? ।। टेक ।।
कहाँ किसीको शांति मिली है ?।
जिनकी तृष्णा भोग - बली है । |
छलबतल - छलबल जीवनभर में -
भागता भटकता है फिरता। तू राम0 ।। 1 ॥
जहाँ देखता, चंचल मन है।
जैसे बन्दर उछले बन हैं।।
डगमग डगमग नैय्या डोले-
शरमता भरमता, है भिरूता। तू राम0 ।।2।।
चला. जायेगा सत्संगत. में,
भाग. खुलेंगे... जाते... रंगमें ।।
तुकड्यादास कहे, मेरी माने -
उध्दरे जनम, रख भावुकता। तू राम0 ।।3।।