मुझको तो एक घडी वक्त नहीं । में तो हूँ सेवक, कोई मुक्त नहीं

मुझको तो एक घडी वक्त  नहीं ।
में तो हूँ सेवक, कोई मुक्त नहीं ।। टेक ।।
भारत के प्रीय सन्त एक कराना।
उनसे ही देश-धर्म ज्योत जगाना।
साधन भी भजन मेरा सख्त नहीं ।। 1 ॥
हो चाहे पंथ कोई, सब हैं बराबर।
हो चाहे धर्म कोई, मुझको है कदर।
पर इमानदार  बिना   भक्त   नहीं ।। 2 ॥
पल -पल की कीमत पर प्रेम जमाना ।
किसकी हो बिगड़ी तो जाय मिटाना |
मेरा है  काम    यही, रिक्त   नहीं  ।। 3 ॥
मेरे दोस्तों ? ना भुलो याद मेरी |
सेवा के काम करो, होके   बरी।
तुकड्या है प्रेम, कोई तख्त नहीं ।। 4 ॥