मादकपर मात करो. सद्गुणकी ।

(तर्ज : कौतुक किती ऐकवावे..... )

मादकपर मात करो. सद्गुणकी ।
छोडो ये दारू, नशा  ये   तनकी ।। टेक।।
है कौन जो पिया और भला नाम किया? ।
जिसने न कभी गाली और गुफ्तार दिया? ।
धनसे, जनसे भी लाज गयी उनकी ।।1।।
ये व्यसनोंकी आदत ही तो खराब है ।
उनमेंसे अति खराब ये शराब है।
नाश करे कीर्ति, पूर्ती अवगुण की ।। 2 ॥
इन्सान ? तुझे मानपर ही चढना है।
सत्‌कीर्ति करनेको प्रेम बढना है।
निर्व्यसनी होके शुध्दि करो मनकी ।। 3।।
देवताकी साक्ष तुझे पाना   हे ।
तब तो शुध्द खान-पान लाना है।
तुकड्याने   बात  कही - भक्तनकी ।।4 ॥