मेरे नैनोमें चढ गई तारी । नशा भयी घनघोर, जोर करे दिल में बाँग पुकारी

(तर्ज: तेरे द्वार खडा एक जोगी...)

मेरे नैनोमें चढ गई तारी । 
नशा भयी घनघोर, जोर करे दिल में बाँग पुकारी ।।टेक ॥
झिमिझिमि बादल बरसन लागा । 
नाच उठा मेरे     हिय   अनुरागा ।।
अनहद गुंजो प्यारी ।
डिमिडिमि डमरु अन्दर बोले ।
जीव-शिव के सब परदे खोले ।।
बलिहारी बलिहारी  ।। 1।।
किस जोगीने जोग  दिलाया ।
अपनी परकी तोडी    माया ।
एकता की चढी तारी |
सोबत-जागत चलते - हलते |
अन्दर बाहर चौओर डुलते।।
एकही वृत्ति हमारी ।।2 ॥
सब  करना-धरना मन भुला ।
अनेक में रह, रहा   अकेला ।।
बनकर मैं ही मुरारी ।
तुकड्यादास आस नहिं ऊठी ।
निजरुप    में गुरुकिरपा लूटी।।
स्वाँसो की झनकारी ।।3।।