खोलो जी ! खोलो, मेरे दिल का मन्दर,
(तर्ज: देखोजी देखो मेरा दिल लेके...)
खोलो जी ! खोलो, मेरे दिल का मन्दर,
ख़ुलाना पडेगा ।।टेक॥
सोया है क़बसे जिया, पता नहिं पाया मैंने ।
जगाना पडेगा।
अंधेरा पडा है सारा, नही ग्यान ध्यान कोई ।
सिखाना पड़ेगा ।
सनम! तेरी याद मेरे, जिगर में बसा के।
आना पड़ेगा ।।1।।
खड़ा हूँ लगाकें तेरे, किनारेमें नैयां मेरी ।
निभाना पड़ेगा ।
सताया हूँ चारों ओर, कहीं ना सहारा मुझको ।
उठाना पडेगा।
जिस्म जाग ऊठी मेरी,कहे दास तुकड्या।
जिलाना पडेगा।।2॥