दोनयना इसलिये बचाये, दूरहिसे मैं देखूं तुम्हें, देखूं तुम्हें ।।टेक ॥
(तर्ज: हृदयी जागा तु अनुरागा... )
दोनयना इसलिये बचाये, दूरहिसे मैं देखूं तुम्हें, देखूं तुम्हें ।।टेक ॥
यों तो तन सारा बिगडा है, विरह व्यथासे हिय उजडा हैं।
सिरपर उसका बोझ बढा है पैर उठे यह धिमें धिमें ।।1॥
सारे जीवनमें सोचा था, मधुर प्रेम मिलने का ताँता।
पर यह हुई अजब की गाथा, दिल॒ दिमाग रह गये श्रेमें ।।2॥
जो कुछ बची समय है मेरी, ऐ प्रीतम ! मत करना देरी।
तुकड्यादास कहे यह अखेरी, अभी चरणमें लेहू हमें ।।3।।