बढजा ! बढजा ! ! तेरा होश जवानी का है ।।टेक ।।
(तर्ज : सजना ! काहे भूल गये दिन प्यार के... )
बढजा ! बढजा ! ! तेरा होश जवानी का है ।।टेक ।।
यही बखत है कुछ करनेका।
नेकी से आगे बढनेका ।।
नाम पिता का सार्थक करजा।। करजा0 ।।1॥
कई बीरों ने आजादी की -
करी प्रतिज्ञा पूरी भी की ।।
तू भी उनसे अगुआ बनजा ।। बनजा 0 ॥2 ॥
घुसखोरी को बन्द करा तू -
चरित्र जिनके गिरे पड़े तू ।।
उनके द्वार पे जा के अडजा।। अडजा0॥3 ।।
लुचपतखोरी और जुंवारी -
शराबबाजी औ व्यभिचारी ।।
इनके दिल में तू तडफडजा।। तडफडजा0।।4॥
मीठा बोलके काम जुड़ा दे -
प्रेम लगाकर व्यसन छुडा दे।।
कुछ तो आखिर कर जा।। कर जा0॥5॥
कइ पागल घुमते हैं जग में ।
तुकड्या कहे तू नहिं उनमें । |
तू इस कार्य को कर मरजा।॥। मरजा0।।6॥