दोनों का नाम है, जग में, दोनों का नाम है ।। टेक ॥

(तर्ज : तुमको सलाम है... (गजल)

दोनों का नाम है, जग में, दोनों का नाम है ।। टेक ॥
या तो कोई रावण-सम होवे।
या तो बिभिषण के गुण गावे।।
तरही      गया   है ।। जगमें0।।1।।
इधर नहीं और उधर नहीं है।
उन्हीं की नैय्या बीच पड़ी है।।
उनको ना धाम है ।। जगमें 0।।2।।
इस कारण कहता हैं, सुनिये।
ऐसो काम करो, प्रभु मनिये।।
ना तो   अराम  है ॥ जगमें 0 ।।3।।
या तो पद पावो निर्बाणी।
या तो  क्रूर बनो मनमानी।।
सूबो या  शाम  है ।। जगमें 0।।4।।
तुकड्यादास कहे, बढ जावे।
दुनियाँ जब तुम्हरे गुण गावे।।
इतनो ही  काम है ।। जगमें 0।।5।।