खोलो नैना भजो राम भाई !

(तर्ज : तू तो रामनाम भज तोता .... )
खोलो नैना भजो राम भाई ! दिन बीता नजिक रात आई ।।टेक।।
जो कि करना सो करना निहारा ।
जिसे डरना सो हरलो पसारा ।
जो पकरना सो धरलो पियारा ।
वक्त खोया न आवे पुनारा । भूल जावे सभी चतुराई ।।१।।
जोरु लड़केसे मन मार डारो ।
याद घरकी शरिरकी बिसारो ।
खास अपना जो मैं - तू बिसारो ।
जो कि अपना पता पाय हारो । होवे जन्नति-दार खुलाई ।।२।।
भाई! पलका नहीं है भरोसा ।
घड़ी पलमें उखड जावे श्वासा ।
अबसे कर अल्लाहकी अभिलाषा ।
नहि तो होगा फँसाई तमासा । मेरि मानो कही सुखदाई ।।३। 
जो अँधारी नजरम्यान होवे ।
फेर नवमास गोता दिलावे ।
गोते चौऱ्यासी तुमको खिलावे ।
दास तुकड्या यहीको कहावे । मिलनेसे दुखाई हकाई ।।४।।