नौजवानों की बुध्दी को मोड दियो है।
(तर्ज: दो हंसो का जोडा.... )
नौजवानों की बुध्दी को मोड दियो है।
सीने -दुनियाँने, सब कुछ मरोड दियो है ।।टेक ॥
अच्छे घराने की लड़कियाँ भी नाच करे।
रहन-सहन पहेरावसे दिन भर लिबास करे।।
छोटे-छोटे बच्चे तो विषयोंका ध्यास करे।
आदर-मरातब के नाते को नाश करे।।
धर्म, नीति, निश्चय को तोड़ दियो है ! ॥1।।
हरे - भरे घरबार, फूट - फाट हो गये।
सीधी -सादी रहनी के उल्टे ठाट हो गये।।
नकली कलाओंसे सबके दिलमें घाट हो गये ।
शीलवान बच्चे गानेके भाट हो गये।।
तसबीरने नटियों के,घर निवास कियो है ! ।।2।।
आँखो की पुतलि के तेज को बिगाडती है।
नम्रता की बातों को जडसे उखाडती है।।
फैशन के वास्ते ही जेब दार फाडती है।
थोडा अच्छा,बुरा ज्यादा करकेही नाडती है।।
तर्जे उठाये तुकड्या, जोर दियो है ! ॥3॥