भक्ति बिना मुक्ति नहीं।
(तर्ज : नैन मिले चैन कहाँ...)
भक्ति बिना मुक्ति नहीं।
जीवन में शक्ति नहीं ।।
भक्ति ही उधारे, पार करे ।।टेक।।
भक्तीका अर्थ यही, झूठ न हो प्रीत कहीं ।
काया-मन-वाच सही।। भक्ति ही उधारे0 ।।1।।
भक्तिका हि यह प्रकार, आज्ञापालन अधार।
नित्य चले सदाचार।। भक्ति ही उधारे0 ।।2।।
स्वामी ही सर्व धर्म, सेवाही उचित कर्म ।
जाने जो वर्म- मर्म।। भक्ति ही उधारे0।।3॥
भक्तिका बल महान, पावे वहि हो सुजान।
तुकड्याको यही ध्यान ।।भक्ति ही उधारे0।।4।।