प्रभू ! दिल मत तोडे तोडे, मत बीच नावको छोडे।

(तर्ज: तू घन मत जोडे जोडे ...)

प्रभू ! दिल मत तोडे तोडे, मत बीच नावको छोडे।।टेक
भवसागरके बिकट घाटसे, निर्भय पार उतरना है ।
निजानंद आनंद मिलाने, तुझसे जीवन जोडे ।। १ ।। 
घर छोडा, घरका डर छोडा, मै-तू छोड न जाना है ।
चढना है प्रीतम का मंजिल, दुनियासे मँह मोडे ।।२।।
तुझपर रखकर पुरा भरोसा, तेरा पहना बाना है ।
तकड्यादास रंगाले तुझमें, रहूँ चदरिया ओढे ।।३॥।