पैर मिलाकर के चलो - सब के हाथ एक धरो ॥

(तर्ज : नैन मिले चैन कहाँ... ?)

पैर मिलाकर के चलो - सब के हाथ एक धरो ॥
बाद में हमारा साथ करो! ।।टेक।।
संगठन की रीत यही।
तब होगी जीत कहीं।।
सेवा की   बात  भरो ।। बाद  में  हमारा 0।।1।।
मतलब की रीत जहाँ।
नहिं होती जीत वहाँ।।
गर ये हो तो पिछु सरो।। बाद में हमारा 0।।2।।
मुँहपे कहे मीठी बात।
अन्दर से दिलि जलात।।
ऐसोका त्यागो नात ।। बाद में हमारा 0।।3।।
अन्दर हो साच प्रेम ।
चरित्र - नीति शुध्द नेम ।
यही धरके दिलमें काम ।। बाद में हमारा0।।4।।
तुकड्या की है पुकार।
आओ सब करणधार।।
करने को हित-उध्दार ।। बाद में हमारा 0।।5।।