मेहमान सभी हैं इस जगमें, एक दिन यहाँसे जाना है ।
(तर्ज : एहसान तेरा होगा मुझपर.....)
मेहमान सभी हैं इस जगमें, एक दिन यहाँसे जाना है ।
यह सबको पता लगता है मगर, क्यों भुलके होता बहाना है?।।टेक।।
किसिने न देखी रतियाँ किसीकी,शादीहि तो दिखजाती किसीकी।
आज यहाँ कोई बनके चले पर,कलही न उसका ठिकाना है।
यह सबको पता लगता है, मगर 0।।1।।
खेलत बालक युवक बना अब, बूढ़ा यहि बन जाता है कब |
ये कौन गिने इसकी घड़ियाँ,बस योंहि चला ये जमाना है।
यह सबको पता लगता है, मगर 0।।2।।
अचरज है ऐसा जो कहता,समझाता वहि गोता खाता ।
कहता तुकड्या, वारे प्रभु! तेरा खुब बना रंग रैना है।
यह सब को पता लगता है, मगर0।।3।।