यही कर आज कमाई बे, आपमें आप समाई बे
(तर्ज : जपका अजब तडाका बे... )
यही कर आज कमाई बे, आपमें आप समाई बे ।। टेक ।।
भजन-पूजन तो करते करते, सारां जनम गमाया।
प्यासे को नहिं देवत पानी, अपना रुप न पाया ।। १ ।।
द्वैत धारके दिलमें अपने, काम क्रोध लिपटाया।
लोगन को क्या ग्यान बतावे, मायामें चिपटाया ।। २ ।।
देख तुका के भजन पियारे, भजते तनको भूला।
रामनाम धुन धरके मनमें, रामरुप हो डूला ।। ३ ।।
इधर कहे प्रभू एक उधर तो, दुसरे को जा मारा।
कहता तुकड्या अनुभव के बिन, सारा ढोंग धतूरा ।। ४ ।।