धुंदी छोड अभी प्यारे, बडा शिर काल खडा तेरे

(तर्ज : जमका अजब तडाका बे... )

धुंदी छोड अभी प्यारे, बडा शिर काल खडा तेरे ।। टेक ।।

सदा ख़ुशीमें  रहके भाई, श्रीगुरू भजले रे ।
ब्रह्मी ब्रह्म को एक करो, जब साथ चलो मेरे ।। १ ।।

जानो सपना, जग यह अपना, रामबिना मेरे ।
झूठ पसारा भूलके लेवे, फेर पड़े फेरे ।। २ ।।

किसकी माता किसका पिता, जन ये किसके रे ।
सब स्वारथ के जानो भाई, आखिर में घेरे ।। ३ ।।

कहता तुकड्या दास गुरूका, आपहि अपने रे।
हुशार होकर करो काज सब, बीच बडे डेरे।। ४ ।।