पर्वा न कर किसीकी, सीधाहि चला जा।

(तर्ज- क्या जाने अमिरी, गरीबी का मजा क्या है ?..)

पर्वा न कर किसीकी, सीधाहि चला जा।
गर नेक है दुनियाँ में तू, डरने में क्या मजा  ।।टेक ॥
दुनिया भले गाली बके, मत रोक किसीको ।
अपने सरल स्वभावसे, तू मान खुशीको।।
आँखे खुलेगी उनकी, खुद  जायेंगे  लजा   ।। १ ॥
किसको नहीं छोड़ा था, उस साधु सन्त को।
पर सन्त ही ये बोले, शांती-सबर करों ।।
चरणों में लगे उनकी, इतिहास लिया जा  ।। २॥
कहने को सभी होते, पर साथ ना देते।
जब वक्त पड़े, आकर मुंह फेर घुमाते।।
ऐसीहि रीत सोचकर, तू खबलपे बहाजा ।। ३ ॥
विश्वास किसी कार्य का, तूने है उठाया।
बढजा अकेला हिंमत से, यह छोडके माया।।
तुकड्या कहे,यश पायेगा,मेरि मानले राजा ! ।।४।।