बडी बडी बातों में क्या है रख्खा
(तर्ज : मिठी मिठी बातोंसे बचना... )
बडी बड़ी बातों में क्या है रख्खा ?
अपना ईमान तो मोल बिका ।।टेक॥
कहनेको दौलत मोटी, पर खानेको नहिं रोटी ।
घर-घर जावे, कर्ज उठावे, फिर फाखा वैसा सरिखा ।।१।।
जीवन व्यसनोंसे है भरा, अफीम-गांजा औ मदिरा ।
संयम नहीं, कभु दिलमाँही, सत्-संगत में मुंह न दिखा ।।२।।
कभी सत्-संगतमें न गया ? नहिं प्रभुका कभु नाम लिया ।
दिनभर गप है, सब मतलब है,प्रेमकि बात कहूँ न सिखा ।।३॥
एक भी गुण नहिं जाना है,अवगुणका ही खजाना है ।
बात मुजोरी, फिर कमजोरी, कहे तुकड्या रह गया फिका ।।४।।