देखो देखो रे तमाशा देखो रे

(तर्ज : चलि चलि रे पतंग मेरि चल रे... )

देखो देखो रे तमाशा देखो रे,
देखो हमारा उल्हास, सारे विश्वका विलास,
रची जीवनकी रास, कोई   सिखो   रे ! ।।टेक।।
हमी राजा हम है रानी,हम भूमी हम है पानी । 
सभी हमारा है खेल, मरे - जियेका  है  मेल -
नहीं दुसरा    झमेला   कोई   सिखो   रे ! ॥१।।
हम माया हम है प्रभू,हम अलग न होते कभू ।
जैसे फूलसे सुगंध, कोई  साधूओंका  छंद-
वैसे जीवका   आनंद, कोई   सिखो  रे ! ।।२।।
हमीं ब्रह्म हमी है साक्षी,हम तत्व हमी हैं भक्षी ।
कहता तुकड्या ये दास,लिया अनुभव खास -
नहीं होना है निराश, कोई   सिखो   रे ! ॥३।।