मुखमें रामनाम हो, सेवा का काम हो
(तर्ज : चौदवी की चांद हो... )
मुखमें रामनाम हो, सेवा काम हो ।
सौजन्य हो और सत्य हो,शांतीका धाम हो ।।टेक।।
व्यवहार सबहि और हो, दिल के पसंद का ।
जैसे कमल खिला उपर, छींटा न बूंद का ।।
ऐसा मुझे बना दे प्रभू ! पाऊँ मैं राम हो ! ।।१।।
मुझसें न कभी पाप हो,न किसको सता सकूं ?
आऊँ न कभी जोश में, झूठा बता सकूं ।।
साथी हो सभी मेरे, सबको अराम हो ! ।।२।।
जिंदगी ये आखरी की, मस्ती में जायगी ।
ईश्वर के नामपर वो, मोहब्बत सजायगी ।।
तुकड्याकी आस है यही,सुबो और शाम हो।।३।।