मेरी सुनो ना पुकार
(तर्ज: गोरा गोरा मुखडा.... )
मेरी सुनो ना पुकार, अबतों होगया बेजार ।
फिरुँ द्वार - द्वार -- द्वार ।।टेक।।
कैसा मिलेगा मुझे ठिकाना?
कहो किसीके चरणोंमे जाना?
अबतो खायी मैने हार । पूरा होगया नादार ।
फिरूँ द्वार - द्वार - द्वार ।।१।।
तीरथ मेला कर कर आया ।
लेकिन शांति जरा नहिं पाया।
खाया जहाँ -तहाँ मार । पाया कहिं नहीं आधार ।
फिरूँ द्वार - द्वार - द्वार ॥२॥
अब तो छोड दे जाना- आना ।
मूल जगहपर लिया निशाना ।।
तुकड्या बैठा है निर्धार। लगा फकिरीकी तार ।
फिरूँ द्वार - द्वार - द्वार ।।३।।