मेरी बिगडी तूही बना दे
(तर्ज: मे छोड गया बालम... )
मेरी बिगडी तूही बना दे,फिर हँसी-खुशी मन होगा ।
कइ बार किया हूँ अर्जी, तेरा मुझमें आसन होगा ।।टेक।।
तू बैठ उसीपर जाके, सोsहं का बीन बजा दे ।
गाता जा अपने मनसे, मस्ती की तार लगा दे ।।
औरोंके बजाने वालोंसे, नागानी झन-झन होगा ।।१।।
नादान जनम है मेरा, मल-मूत्र भरा है उसमें ।
तेरि दया नहीं जब होगी, तब कीमत क्या खसखसमें।।
तुकड्या कहे तेरी सूरत, गर हो तो जीवन होगा ।।२।।