मन कहाँ विषय में भटका रे

                    (तर्ज: शराबी जा-जा...)
                 मन कहाँ विषयमें भटका रे ।
रख याद,पडेगा झटका -पडेगा झटका । उडेगा खटका रे ।।टेक।।
दो दिनकी यह जानि-जवानी, फीर    पडे   हैरानी ।
बडों-बडों की बिखर गयी है, जमी हुई जिन्दगानी ।
रख आज समझकर ख्याल, बचाले हाल,जायेगा अटका ।।1॥
समझबुझकर इस दुनिया में, अपना कदम बढाले।
मत किसके फंदे में  आये, खूब - खूब  समझा  ले ।
सुन सन्तो की आवाज, छोडकर लाज, फोड घर हठका ।।2॥
तेरे ही थे साथी - संगाती, उनकी छूटी बारी ।
बिखर गये घरबार उन्होंके,मिट गयी क्यारी-क्यारी ।
कहे तुकड्या सुनले तान,बचाले जान, लगा प्रभु चटका ।।3।।