मन मोहगयी रे ! प्यारी कुटिया किसानकी
मन मोहगयी रे ! प्यारी कुटिया किसानकी ।।टेक।।
नन्हे नन्हे बालकोंने बछिया सम्हाली ।
आंगनमें पानी -चौक माँने लगाली |
काली काली कामधेनू दोह गयी रे !।। प्यारी0।।१ ।।
छोटेसे आँगन में तुलसी -बिंदराबन |
फूल-फल चारों और, छाया सुन्दर घन ।।
सबेरे के ध्यानसे प्रभात भयी रे ! ।। प्यारी0 ।।२ ॥
कोउ करे खेती -काम, किसीको मजूरी ।
बूढ़ा करे घर-काम, आस छगा पूरी।।
चुगली - चहाडीका नाम नही रे ! ।। प्यारी 0।।३ ।।
सबका भगवान एक,सबकीही जान एक ।
बालबच्चे न्यारे न्यारे,सबकीही शान एक । ।
तुकड्याको वही भायी काशी पुरी रे !।। प्यारी 0।।४॥