पुकार भूमिदान की
(तर्ज : प्यारा हिन्दुस्थान है.. )
पुकार भूमिदान की यह देशके किसानकी ।
सुजानकी, अनजानकी यह लाट है तुफानकी ।।टेक॥
धनको बाँटने चली, विषमको काटने चली ।
यह बेकारी उच्चाटनेको है बडी ही कामकी ।।1।।
भूखको मिटायगी, यह कामको उठायगी ।
देशके निर्माणमें है राह बड़ी शानकी ।।2॥
हक्कका खिलायगी यह नेकसे चलायगी ।
श्रमके जमानेमें भूमि होगी प्यारी प्राणकी ।।3।।
प्यारे भूमि-मालको! पहिचानते हो कालको ?
दो साथ भूमिदानको, यह बात है महानकी ।।4।।
भूमि दो! छाती खोल के, अपनी नेकी तोलके।
छोटी -मोटी बात नहीं,यह क्रांति है जहाँनकी।।5।।
बख्त गमा जावोगे, तो आगे धोखा खावोगे ।
तुकड्यादास कहता है, ये बातें रामबाणकी ।।6॥