भूखी जनता आबतक रोई
(तर्ज : सुनी खबर की गाडगेबाबा .... )
भूखी जनता अब तक रोई, कदर नहीं किसको आयी।
भूमीदानसे दुःख होता हैं, कौन बात हैं दुखदायी ।।टेक ।।
क्या ईश्वर ने यह बोला हैं , किसका खाना छिन चलो।
लड़के बच्चे मरने दो पर, अपने मतलबसे न ढलो ।।1।।
एक रहे दुनियामे सुखी, और दुजा हो कंगाल यहाँ ।
बिना कष्ट के एकजीये, और श्रमिको के हो हाल यहाँ ।।2॥
यही बात अब तक पायी हैं, समाज का है दोष बडा।
ईश्वर जो फल देगा सबको, जिसका जो हो झगडा।।3॥
ईश्वर के प्यारे हैं जो जो, उनसे मैने बात सूनी ।
जो गरीबोकी कदर करेगा, उसकी रक्षा प्रभू करे।।4।।
समझ बुझकर भूलो नही, अब भूमिदान धनदान करो।
अपना भी कल्याण करो, उन भुको के भी प्राण भरो।।5।।
तुकड्यादास कहे यह झोली, भूमिदान बीन भरती नही।
मान करो अपमान करो, है मेरा अब तो काम यही ।।6 ।।