भारत के प्राण हमारे !
(तर्ज: जीवनकी नाव न डोले...)
भारतके प्राण हमारे ! बताओ कैसे याद बिसारे ?
गोपिनके प्राणपियारे ! बीरोंके नैन उजारे ।।टेक।।
अबलाकी लाज गयी, गौएँ खलास भयीं ।
बच्चोंको रोटी नहीं, सच्चोंको मूँह नहीं ।
कौन आके ब्रीद सँवारे ?-दे देंगे सहारे ?।। बताओ 0।।1।।
छोटेसे गोकुलमें, आया था मोहन !
बंसीकी धून सुना, गाया था मोहन !
तुकड्या अब फिरसे पुकारे, मेरे नंद दुलारे ! ।। बताओ0।।2॥