मेरा ध्यान तुझसे लगादे भला

(तर्ज : कया मिल गया है,. क्या खोगया...) 
मेरा ध्यान तुझसे लगादे  भला ।
चाहे शोर या और हो गलबला ।।
हजारोंमें तुझको ही देखूं खुला ।
मनसे  पूजूं   भला, बोलूं   भला ।।टेक॥
मेरी आरजू, तुझसे छीपी  नहीं  है ।
तू आँखे लगा, या रहा जा कहीं है ।।
ये सारे बने, पुतलों के मनि हैं ।
तेरा सूत्र किनसे न. जाता हिला।।
                        न जाता हिला ! ।।1।।
तेरे ध्यान में मान है, विश्व गाता।
तेरे नाम में शक्ति है, जो तराता।।
तेरे प्रेम में मुक्ति है, दिलको भाँता।
वो तुकड्याको तू इसलियेही सुहाता -
                     इसलियेही सुहाता।।2॥