मत ध्येय बदल, लक्ष बदल

              (तर्ज: अब तेरेसिवा कौन... )
मत ध्येय बदल, लक्ष्य बदल, कामको बदल ।
सीधाही चल, न हल,न ढल,न कर कहीं खलबल ।।टेक।।
तेरे खुशी की   यादें  दुनिया  हे  बनाई ।
करता है तेरी मौज में वह कौन मनाई ।
पर याद रख,किसीको नहीं तू बना निर्मल ।
                    सीधाही चल 0।।१।।
हँसनेको किसीको न कहीं रोक लगा दे ।
मतलबके सिवा प्रेम कर यह सबको  सिखा  दे ।
तुकड्या कहे यह मान, निकल पार कर मजल ।
                  सीधाही चल0।।२।।