मेरी मौत मेरे सामने
(तर्ज: तू गुपित कुणाला सांगु नको.. )
मेरी मौत मेरे सामने सुबह आगयी ।
कह गयी गौरसे और बात कुछ नई ।।टेक।।
अब समय नहीं रह गया,
दें बता तूने क्या किया?
जो इतनी आयू तुझको जगमें भई।।कह 0।।१।।
कया सेवा तूने किया?
या पापही ज्यादा भया?
जो करे उसीको सजा न चुकती कहीं ।। कह 0।।२।।
सत् चरित्र कितना बना?
या हुआ विषय में फना ?
तुकड्या कहे निजरुप पहचाना या नहीं।।कह 0।।३।।