दुसरोंके भरोसेपर क्यो

        (तर्ज : पहलेही अगर हमसे...)
दुसरोंके भरोसेपर, क्यों   रंग  लडाता  है?
अपनाही समझ ले तू, वह बढके बढ़ाता है ।।टेक।।
अपनीही कमाई खा, जो खुदसे कमाई हो।
मत पास जरा रख तू दुसरेकी जमाई  हो ।।
वह शेर कहा जाता, जो  गमको चढाता है ।।१।।
है इश्क वहीं सच्चा सबकी गुजर निभा  दे ।
ना मरके हट किसिको इकबार जो जबाँ दे ।।
तुकड्या कहे जीवनको,क्यों हटके गडाता है?।।२।।