प्यारे ! दुई का पडदा तोड दो
(तर्ज: बनी मुकुंद दिसला साजनी... )
प्यारे ! दुई का पडदा तोड दो ।
प्यारे ! दुई का पडदा तोड दो ।।टेक।।
एक गाँव के रहनेवाले हो ।
सारे नेकीसे कामधाम साधलो ।
गरीब - अमीरों ! कहना मानो ।
सारे लोगोसे बुराई छोड दो ।।१॥
सबकी भल्ताई में अपनी भलाई है ।
यह जो समझेगा उसको दुहाई है ।।
अपना-अपना व्याप ही ना हो ।
एक ईश्वर के है प्यारे बंदे ।।
कहता तुकड्या सोच समझले ।
गाँववालोंसे दिल को जोड दो ।।२।।