मुझको पढनेका आलस है

           (तर्ज: जगमें हीरा मिलत कठीना ... )

              मुझको पढनेका आलस है ।
क्या पढ़नी है और किताबें,भरी जिंदगी बस है ।।टेक।।
ऊँच बनूं तो ऊँचे देखूं, महापुरुष का   जश   है ।
काम करु सेवा में रहें नित यही मेरा  साहस  है ।।१।।
दुनियाकी हर वस्तु सिखाती,अपने कामका कस है ।
जो लेना सो लेता   हूँ  मैं, छोड  मोहका  रस  है ।।२।।
अपनी आँखे खोलके समझूं,इस दुनियाकी नस है।
तुकड्यादास कहे मानवता,रखूं  प्रेमके  बस  है ।।३।।