बातोंमें जन्म गमाया है, अनुभव कौन कमाया है

भजन २०
(तर्ज : जमका अजब तडाका बे... )

बातोंमें जन्म गमाया है, अनुभव कौन कमाया है? ।। टेक ।।

चित्त शुध्दकर अपना, जिसमों सत्य रमाया है।
पर्गमें जा उसके अब समझो रुप, न माया है
।। १ ।।

नश्वर यह भव संग धराकर, मौज उडाया है।
जन्म मरण के फेरे लागे, द्वैत बढाया है ।। २ ।।

परब्रम्ह अविनाश ब्रीद॒ जो, तनमें हे समाया है । जब पाँचोंको छोड दिया, तब निजको पाया है
।। ३ ।।

कहता तुकड्या निजी बीज धर, अमोल काया है ।
जन्म सुधारो अपना प्यारे, नश्वर माया है 
।। ४ ।।