प्रेमरस चखवा लेता है, वही भवसिंधू तरता है

भजन २३
(तर्ज : जपका अजब तडाका बे... )

प्रेमरस चखवा लेता है, वही भवसिंधू तरता है ।।टेक।।

कौन किसीका साला भाई, पलका नाता है।
अंतकाल में आपही भोगे,  मूरख सोता है।।१।।

सब बंधनको तोडो प्यारे, जन्म मिटाता है।
साबू लेकर गुरु-चरण की, जो दिल धोता है
।।२।।

भरा बंब मैलेंका पानी, काला होता है।
चित्त स्थिर कर विवेक-कुंजी, ले वह जाता है
।।३।।

कहता तुकड्या लीन बनो जब, सबका दाता है।
अंधा होकर विषय भ्रमाया, उडता तोता है 
।।४।।