दूर गये हरिजन को, अपने पास बिठालो रे !

         (तर्ज: आजा आजा आजा रे...) 
दूर गये हरिजन को, अपने पास  बिठालो  रे !
पास बिठालो, पास बिठालो, गले लगालो रे ! ।।टेक।।
हम सब एकहि थे पहले,सेवाखातिर रहे खिले ।
इन   बातोंको  भूलके  अपनी, भूल  सुधारों  रे ! ।।१।।
धेड, माँग,चंभार हुए औ भंगी कुछ परधान रहे ।
तुमरी सेवा  करते   है, यह   होश  सम्हालो  रे ! ।।२।।
ईश्वर सबके लिये बना है,धर्म-वर्म कहता अपना ।
करो कुएँ - मंदीर खुले, सब   भेद   हटालो   रे ! ।।३।।
सब मिलकर दिल साफ करो और भारतको समृद्ध करो ।
यह रीती आबादी की, अब   गले   लगालो  रे ! ।।४।।
जो चालचलनसे ठीक हुआ,वह कैसे अस्पृश्य रहा ।
झुठि कहानी तोड - तोड़कर नयी   बनालो  रे ! ।।५।।
आवो सब मिल साथ करो,तब दुसरोंसे बात करो ।
कहता तुकड्या जुल्म करे, बस उन्हें निकालो रे ! ।।६।।