मत मार गऊँ यार कभी !

 ( तर्ज :- मम बंधु सखा शून्य जगी...)
मत मार गऊँ यार कभी! पाप अपारा ! !
सुन शब्द हमारा ।
मत बेच कसाबों के गले, जान बिचारा ।।
सुन शब्द हमारा ।।टेक।।
इस देशको है काम, गऊँ ! बैल   दिलाती ।
कई बालकोंकि माँ समझके,दूध पिलाती ।
मलमुत्र भी देकरके उन्हें, रोग   निवारा ।
सुन शब्द हमारा ।।१।।
गऊँ चीज है प्यारी, उन्हें श्रीकृष्ण चरावे ।
गोपाल भी बडे - प्रेमसे गोधन को चरावे ।
तू क्यों नहीं है जानता, उपकार ये सारा ।
सुन शब्द हमारा ।।२।।
भारतमें बिना बैलके, खेती नहीं होती ।
खेती पके बिना न तेरि शान भी होती ।
आती हो भितर तो खिला दे पेटमें चारा ।
सुन शब्द हमारा ।।३।।
गौएँ सुखी होगी तो तेरो नाम गोपाला ।
गर मर रही होगी तो तेरा मूंहहि काला ।
तुकड्या कहे ये मान, जनम व्यर्थ है तेरा ।
सुन शब्द हमारा ।।४।।