भारके बलवान जंगमें !
(तर्ज : आजा आजा रे...)
भारत के बलवान ! जंगमें, आजा आजा रे ॥टेक॥
तूही था हनुमान बना, लंका को कर दिया फना ।
छोड छोड आलस तू अपना, जिसम सजा जा रे ।।१॥
तूही था अर्जून हुआ, गीताकी ले लिया दुवा।
और न तेरे सिवा तू अपना तीर सजा जा रे ।।२॥
तू बंदा बैरागी है तुझमें ज्योती जागी है ।
लगी देशको आग, तू अपना शस्र सजा जा रे ।।३॥
वो शक्ति तुझमें हैं भरी, खंब तोडकर तनू धरी ।
गुरगुराटकर, तेरा वह नरसिंह दिखा जा रे ।।४॥
यह जंग है आजादीका, भारतकी आबादीका ।
कहता तुकड्या तुझको हक,दिलखुषी मना जा रे।।५।।