यह मातृ-पितृ - भू हमें
(तर्ज: अब तेरे सिवा कोन मेरा... )
यह मातृ-पितृ-भू हमें, प्यारी है जानसे ।
प्यारी है जानसे, रहे बढके जहाँनसे ।।टेक।।
इसके लियेहि हम औ हमारा वतन् रहे ।
सब नौजवान की जबान एकही कहे ।
आजाद रहेंगे सदा, जीयेंगे शानसे ।
जियेंगे शानसे, रहे बढके जहाँनसे ।।१।।
छोटा-बडा औ राव - रंक भाव हरेंगे ।
सब एक जात होके, बात यूंहि करेंगे ।
आबाद करेंगे ये मुल्क ! जान - मानसे ।
जान मानसे, रहे बढके जहाँनसे ।।२।।
जितनेभि वीर, देशभक्त, संत, ग्रंथ है ।
तुकड्या कहे आशीस उन्होंके अनंत है ।
पीछे न रहेंगे अभी, अपने निशानसे ।
अपने निशानसे, रहे बढके जहाँनसे ।।३॥