भारत से टकराओगे मिट्टी में

              (तर्ज: प्यारा हिन्दुस्थान है... ) 
भारतसे  टकराओगें,  मिट्टी  में   मिल   जाओगे ! 
अभी तो खाना-नहिं है तुमको, भूखेही मर जाओगे ! ।।टेक ॥
भाई - भाई !  कहते   हो, पीछे   धोखा   देते       हो !
याद रखो! यह पाप बढाकर, भारत जाग उठाते हो ।। १।।
भारत शान्ति चाहता   है, विचार   ऊँचे   रखता   है ।
लडनेको भी कमी नहीं, जब जंगमें आये उतरता है ।। २।।
सोया शेर जगा देना, उसपर वार चला देना ।
फाडके खायेगा शत्रूको,जरा न इसको भुल जाना ।।३।।
नौजवान सब एक हुआ, पक् ष- पंथका जुड़ा दुआ !
अब तो वह असमान चढेगा,रहे न हकको लिये सिवा ।।४।।
जंगमें जीत हमारी है, हम शिव-राणा-परिवारी है ।
गुरु-गोविंदका साथ है हमको,बन्दा की ललकारी है ! ।।५।।
धनकी है खैरात यहाँ, खूनकि है एक  जात  यहाँ !
जानोंकी परवाह नहीं है, मानकि है  जब  बात  यहाँ ।।६।।
कहता तुकड्या सुन जाओ, भले-भले वापस जाओ ।
बिना मरे नहिं रह पावोगे, भारतसे जब टकराओ ! ।।७।।