बिराने देशमें आकर
(तर्ज : प्रभू हा खेल दुनियेचा .. )
बिराने देशमें आकर । न कुछ हासिल हुआ भाई ।
गमायी जिंदगी सारी । खबर मेरी मुझे नहीं ।।टेक।।
अगर मैं देशमें अपनी । प्रभु-घर कूँच बन जाता।
तो बल्की ठीक था सबसे । करूँ क्या खबर ना पाई।।1।।
अगर खूशबोंइँ फूलोंकी । उमलती झाडके अंदर ।
तो मुमकिन था कि इईश्वरके । कदमकी नूरी बन आई ।।2॥
यहाँ आकर मनुज-तनमें । अगर प्रभु-नाम ना लिया।
तो तुकड्यादास कहता है । नरक-बिन साथ ना कोई ।।3॥