मेरे नस - नसमे ध्यान अंतर बानी का
(तर्ज : रेश मिसलवार कुरता जालीका... )
मेरे नस-नसमे ध्यान अंतर बानी का ।
सुनता हूँ आवाज आतम ग्यानी का ।।टेक।।
जब आसन पर आता हूँ, तब दुनिया भुल जाता हूं ।
धूनमे जब रंग जाता हूँ, अलमस्त नशा पाता हूँ ।।
ज्योति निरबानी का,सुनता हूँ आवाज आतम ग्यानीका ।।1।।
दिखे अपने में प्रकाश, षडचक्र फिरे हर स्वाँस ।
"बजे अनहद की आवाज, मिलता है खुशीका राज ।।
प्रेम गुरु ग्यानी का,सुनता हूँ आवाज आतम ग्यानी का ।।2।।
यह किसने दिया है, प्यार मेरा गुरुदेव करतार ।
जाऊँ चरणोंपमें बलीहार कहे तुकड्या न तुटे तार ।।
सार निरबानी का, सुनहूँ आवाज आतम ग्यानी का ।।3।।