मेरे दिलमें गुरुने जादू किया
(तर्ज : यह प्रेम सदा भरपूर रहे ... )
मेरे दिलमें गुरुने जादू किया, मेरा ध्यान न लगता है घरमे ।
तनमनमे मेरे छायी है नशा, उस धुंद का चक्कर है सरमे ।।टेक।।
नहि नैन लगे किसी औरन पे, धन माल भले हो लाखोका ।
बस एक दिखे गुरुदेव मेरे, कही लाख दिखे एक पलभरमें ।।1।।
हर रोममे है हर बातमे है, हर चिजमे है गुरुदेव मेरा ।
मै देखू जिधर गुरुदेव ही है, सत्संग बडा दुनिया भरमे ।।2।।
नहीं स्थान उसीका एक रहा, सब स्थान उसीने व्यापे है।
यह प्रकाश पडा नैननमे मेरे, फिर क्यो ढूँडू उसे दरदरमें ।।3।।
उनकी सेवामे काल कटे, अरु अंत हो उनके चरणोमें।
तुकड्या न चहे अब दिलसे कोई, बस लपट रह गुरुकी धूनमे ।।4।।